1. कल 10 जून को उज्जैन लगभग पौने तीन दोपहर पहुंचे और प्रीति अग्रवाल के यहां किया और वही उनके घर मुख्यतः महिलाओं की बैठक हुई, 15 के लगभग महिलाये, विभाग संयोजक दिलीप जी भी आये थे।
2. श्री अशोक शर्मा जी के रूखे व तानाशाही स्वभाव के बारे में सभी की शिकायत थी। पूर्व सह विभाग संयोजक जसमत सिंह भी इन्ही के दुर्व्यवहार से परेशान हो कर शांत बैठ गए। प्रीति जी को भी इन्ही ने ढूंढा, अब एकदम मुक्त कर दूसरी महिला को दायित्व दे, ऐसा आग्रह उनका है। दिलीप जी भी परेशान कि छोटा मोटा कोई कार्यक्रम किया नहीं, कि उनकी नाराजगी बढ़ी नही। कुलमिला कर उनको कैसे डील करे? अलका जी व सुरेश जी का भी यही मत। अशोक जी भारत विकास परिषद का भी पूरा काम सम्हालते है, दूसरी बार प्रमुख बने है। टिकट की दावेदारी पिछली बार भी थी।
2. जो महिलाएं आयी वो पर्याप्त समझदार है, तीन जे पास वहां के किसी नगर का काम भी है। कुलमिलाकर अलका जी उन्हें सम्हाल व आगे बढ़ा सकती हैं।
3. बहुत बड़ा तीर्थस्थल है, देशभर से लोग आते है अतः सम्हाल जरूरी है।
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