23 से 26 सन 21 को अक्टूबर प्रवास है। 24 को ।25 अक्टूबर 21 1. बाड़मेर जिला: एक विशेषता बहुत बड़ी बताइए भागीरथ चौधरी जी ने के जाट कार्यकर्ता बाड़मेर जिले में सबसे ज्यादा है और एक किला और है यानी नागौर जिसमें काफी संख्या में जाट कार्यकर्ता संघ के अंदर है। दूसरा किसान आंदोलन से बाड़मेर जिला बिल्कुल अछूता है। कर्नल सोनाराम यहां के जो एमपी बने एकदम लोकप्रिय हो गए हैं और कृषि राज्य मंत्री इसी इसी जिले के हैं आता है यह विषय जिला विशेष रुप से ध्यान देने योग्य है।
2. खादी विकास योनि केवीआइसी। रात्रि को महेश श्रीमाली के पिता जो कि 2 विषयों में. हैं और 75 वर्ष से ऊपर के हैं वे खादी ग्रामोद्योग के जिला के सचिव रहे और खाती द्वारा किस प्रकार से दूरदराज बैठे गांव के अंदर उनके घर के अंदर ही रोजगार उपलब्ध करवाने का काम होता है इसके बारे में उनकी जानकारी अच्छी है। उनका नाम चलता है और महेश जी कहीं भी जाते हैं तो पिता का नाम देने के कारण से उनको सम्मान मिलता है। एक स्टोरी उन पर कवर करनी चाहिए। आगे जाकर के जो हम ग्रामीण विकास के पैनल बना रहे हैं उनमें से एक खादी ग्राम उद्योग होना चाहिए और उसको एक व्यक्ति को अच्छे ढंग से स्टडी कर आज के मंत्री से उनकी बातचीत करनी चाहिए। सौभाग्य से खादी ग्रामोद्योग को 5 सत्रों में बांटा गया है और जो उनके डायरेक्टर बनाए गए हैं वे अधिकांश अपने परिचित हैं। बसंत जी इस क्षेत्र के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं मनोज सिंह बिहार झारखंड आदि और बंगाल के भी प्रमुख हैं आशा क्षेत्र में अलग से बनाए गए हैं उनसे भी परिचय करना चाहिए।
3. जब भी क्षेत्र में प्रवास करते हैं तो वह भागीरथ चौधरी के बारे में सम्मान की भावना बढ़ जाती है। उनको जमीनी समझ है और कुछ ना कुछ कार्यकर्ताओं पर भी अपेक्षाकृत ज्यादा पकड़ हैं। वे हमेशा सकारात्मक भी रहते हैं और इस कार्यक्रम को सफल करने के लिए वे स्वयं 5 से 7 स्थानों पर गए हैं। अगर एक जिला और एक अधिकारी नियुक्त करना हो तो इनके साथ मिलकर के बाड़मेर जिले को जिसमें संघ का बड़ोदरा जिला भी आता है हम अच्छे ढंग से कवर कर सकते हैं। उनकी आर्थिक समस्याओं को भी हल कराया जा सकता ह। घेवरचंद जैसे कई कार्यकर्ता भी उनकी संस्था से निकलकर के आगे समाज में काम कर रहे हैं। इस जिले पर कंसंट्रेट करना चाहिए।
4. कल का भाषण रोचक था और हृदयस्पर्शी भी था। अब अपने जिले को हम स्वयं नहीं उठाना है उसके ऊपर फोकस स्पष्ट था परंतु बहुत अच्छी तैयारी के साथ सब बिंदुओं को ले ऐसा नहीं हो सका था। समय भी ज्यादा लग गया खाना किस समय था भी। यदि 150 संख्या थी तो उसमें से 90% या 95% किसान या किसान परिवारों के थे अतः आगे इस काम को बढ़ाया जा सकता है। जो शिव काका की राष्ट्रीय किसान संघ है उसके पदाधिकारी भी स्वदेशी में आना चाहते हैं, ऐसा बताया। उनका काम कैसा है यह भी पता करना चाहिए। दूसरे सत्र में मैं विश्राम करने चला गया और काफी ज्यादा समय लग गया। मुझे उम्मीद थी कि तीसरा सत्र होगा जो कि नहीं हो सका इस कारण से जो घोषणाएं हुई उसमें मैं नहीं रह पाया और नए कार्यकर्ताओं से परिचय नहीं हो पाया। लगभग 15 कार्यकर्ता को दायित्व दिया गया और यह अपने आप में उपलब्धि है। धन धन राशि की दृष्टि से 10 लाख से ऊपर का लक्ष्य स्वीकार किया है।
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