[02/11/20, 19:38] : उत्तर क्षेत्र
श्री विजय वत्स जी,
नमस्ते।
आशा है आप ठीक होंगे ।आशा है आपके क्षेत्र में शताब्दी वर्ष समारोप कार्यक्रम बढिया से चल रहे होंगे। हर ज़िले में ये कार्यक्रम सम्पन्न हों, ऐसा मोटा लक्ष्य रखा था, और ज़िले में छोटे छोटे कार्यक्रम हों तथा उनकी संख्या भी एकत्रित करने का काम चल रहा होगा।
कभी कभी ऐसा भी लगता है कि कार्यक्रम करना आसान हित है परन्तु उसका वृत इकट्ठा करना मुश्किल!! तो भी वृत तो इकट्ठा करना ही होता है।
1. वैसे तो संकलन का कार्य मुख्यतः क्षेत्र अनुसार करना है तो भी अखिल भारतीय स्तर पर सूरज जी को एकत्रित करने को कहा है। उसने पूरे देश के प्रांत व ज़िलों की सूची बनाई है। उसके द्वारा 734 ज़िलों की सूची एकत्रित हुए है जबकि विकिपीडिया बोलता है कि 739 ज़िले अब हैं। अपने क्षेत्र की सूची का मिलान कर देखलें, कहाँ कोई गड़बड़ है।
2. उसे कहा है कि प्रान्त अनुसार पूछले की आज किस ज़िले में कितने कार्यक्रम हुए है, और आपभी उसमे उसकी सहायता करें। अर्थात रात्रि 8 से 9 बजे तक मिलान करलें की कोई जानकारी छूट न जाए।
3. अभी कार्यक्रमों की गति धीमी चल रही है, पूछताछ व प्रेरणा और बढ़ानी पड़ेगी, और कुछ नए प्रयोग ध्यान भी आ रहे हैं। एक प्रयोग जैसे कुछ कार्यकर्ताओं ने लक्ष्य लिया है कि फ़ोन द्वारा बात करके परिचितों को ऐसे कार्यक्रम करवाने के लिए कहना। एक -एक व्यक्ति ने शताब्दी वर्ष होने के कारण सौ कार्यक्रम अपने प्रयास से करवाना और बाद में उस प्रान्त में उसकी संख्या जुड़वाने का सुप्रयास करने का सोचा है, और उन्हें सफलता भी मिल रही है।
4. प्रमुख कार्यकर्ताओं को कमजोर ज़िलों की चिंता करनी होगी।
5. मैने श्री बलराज जी व डॉ सुरेंदर जी को कम से कम 100-100 कार्यक्रम अपने प्रयास से करवाने को कहा है, ताकि ऐसे व्यक्ति या गांव जो छूट रहे हैं कवर हो सकें। बाद में वो संख्या सम्बंधित ज़िलों में जोड़ दी जाएगी। आपको भी कुछ अन्य ऊर्जावान व्यक्तियों यथा टपरीवास, जनजातियों वालों, अन्य पुराने विद्यार्थी परिषद के लोगों को ऐसे लक्ष्य, कम या ज्यादा उसकी क्षमता अनुसार देने चाहिए, ऐसा लगता है। कोई दिक्कत आये तो आप समन्वय बिठा लें। क्या ठीक रहेगा?
आपके मन में अपने क्षेत्र सम्बन्धी या अन्य लोगों के लिए सुझाव हो तो दीजिए।
आज एक मोटी मोटी संख्या कवर्ड ज़िलों व कार्यक्रमों की भेजदेवें।
/11, 20:19ज़िलों की संख्या दिल्ली 11, हरयाणा 22, पंजाब 22+1, 23, हिमाचल 12, जम्मू व लद्धाख 22+2,24 योग: 92 हैं। इसमे से सर्वाधिक मुश्किल 10 कश्मीर के हैं। अगर प्रत्यक्ष असम्भव लगते हैं तो ऑनलाइन सोचना। आशुतोष जी के परिचित विद्यार्थी कुछ हो सकते हैं, कर्मचारी आदि भी हो सकते हैं। सतीश जी दिमाग लगाएं तो भी कुछ सहायता कर सकते हैं।तत्पष्चात 2 लेह लद्धाख के (मैं आपको धनी राम जी वनवासी कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री, दिल्ली का फ़ोन देता हूँ, जो लेह में 4 वर्ष विभाग प्रचारक रहे हैं, उनसे मित्रतावश बात करना, सहयोग करेंगे। बाकी आप दिमाग लगाएं तो 1000 गांव वाला लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा। रोजाना 4,5 घण्टे आपके लगेंगे इस काम के लिए, और इस क्षेत्र में रहनेवाले सभी अखिल भारतीय अधिकारियों का सहयोग भी जहां जरूरी हो लेना चाहिए। कृपया उत्तर लिखना।
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