Tuesday, October 27, 2020

rajasthan overall

 

Statistical Rajasthan State Census-2011

 

1Number of Districts33  
2Number of Tehsils244 
3Number of Panchayat Samitis*248 
4Number of Statutory Towns 185 
    4(i)Number of Municipal Corporations 5 
    4(ii)Number of Municipalities166 
    4(iii)Number of Cantonments1 
    4(iv)Number of Municipal Council13 
5Number of Census Towns112 
6Number of Revenue Villages (including Census Town & Full O.G.)44795 
7List of Villages all Rajasthan (Excluding Census Town & Full O.G.)44672 
8Number of Urban Agglomerations(UA) With Out Growth(OG)28 
9Number of Uninhabited Villages Rajasthan1408 
2,10,20 
श्री दुबे जी, आशा है आपके क्षेत्र में शताब्दी वर्ष समारोप कार्यक्रम बढिया से चल रहे होंगे। हर ज़िले में ये कार्यक्रम सम्पन्न हों, ऐसा मोटा लक्ष्य रखा था, और ज़िले में छोटे छोटे कार्यक्रम हों तथा उनकी संख्या भी एकत्रित करने का काम चल रहा होगा। 
कभी कभी ऐसा भी लगता है कि कार्यक्रम करना आसान हित है परन्तु उसका वृत इकट्ठा करना मुश्किल!! तो भी वृत तो इकट्ठा करना ही होता है। 
1. वैसे तो संकलन का कार्य मुख्यतः क्षेत्र अनुसार करना है तो भी अखिल भारतीय स्तर पर सूरज जी को एकत्रित करने को कहा है। उसने पूरे देश के प्रांत व ज़िलों की सूची बनाई है। उसके द्वारा 734 ज़िलों की सूची एकत्रित हुए है जबकि विकिपीडिया बोलता है कि 739 ज़िले अब हैं। अपने क्षेत्र की सूची का मिलान कर देखलें, कहाँ कोई गड़बड़ है। 
2. उसे कहा है कि प्रान्त अनुसार पूछले की आज किस ज़िले में कितने कार्यक्रम हुए है, और आपभी उसमे उसकी सहायता करें। अर्थात रात्रि 8 से 9 बजे तक मिलान करलें की कोई जानकारी छूट न जाए। आपने अभी सिर्फ चार कार्यक्रमों का जिक्र किया है, हो सकता है कि गूगल फॉर्म में इतने ही आये हो, एकबार प्रान्त संयोजकों से वैसे फ़ोन से भी पूछ लेवें। आपके यहाँ 33 ज़िले हैं, हरेक की चिंता हो, ऐसा प्रयास रहे।
3. अभी कार्यक्रमों की गति धीमी चल रही है, पूछताछ व प्रेरणा और बढ़ानी पड़ेगी, और कुछ नए प्रयोग ध्यान भी आ रहे हैं। एक प्रयोग जैसे कुछ कार्यकर्ताओं ने लक्ष्य लिया है कि फ़ोन द्वारा बात करके परिचितों को ऐसे कार्यक्रम करवाने के लिए कहना। एक -एक व्यक्ति ने शताब्दी वर्ष होने के कारण सौ कार्यक्रम अपने प्रयास से करवाना और बाद में उस प्रान्त में उसकी संख्या जुड़वाने का सुप्रयास करने का सोचा है, और उन्हें सफलता भी मिल रही है। आप भी ऐसा सोच सकते हैं क्या? अपने प्रान्त से बाहर भी कोई परिचित हो तो प्रयास करने का लाभ होता है। यहां कर लोग हर प्रदेशमें और बहुत से देशों में भी रहते हैं, क्यों न हर प्रमुख व्यक्ति ऐसा सोचे!! व्यक्तिगत व संगठनात्मक दोनों किस्म के प्रयास रहने चाहिए।
4. प्रमुख कार्यकर्ताओं को कमजोर ज़िलों की चिंता करनी होगी। 
आपके मन में अपने क्षेत्र सम्बन्धी या अन्य लोगों के लिए सुझाव हो तो दीजिए।

Profile

KASHMIRI LAL
D/b 18.5.1951
Place Ambala City, Haryana
Studied up MA ENGLISH AND MA PHILOSOPY,
FROM 1984, WORKING AS SANGH PRACHARAK,
IN haryana, Himachal pr, and in Punjab as PRANT PRACHARAK hoti 2007, thence onward in Swadeshi Jagaraṇ Manch as National Organiser
In Punjab remained connected with issue of ill effects of chemicals in agriculture,
In Himachal Pradesh he pursued thoroughly issues related to environment.
In Swadeshi Jagaran Manch from 2007 he remained connected with issues related traders, farmers and SMEs  and alternative energy resources and lead agitations, and research work on these from time to time. Presently pursuing issues connected with self employment and allied topics.